केंद्र सरकार लोकसभा चुनावों से पहले किसानों के कल्याण के लिए कुछ बड़ी योजनाओं का ऐलान कर सकती है। लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि सरकार कर्ज माफी और सीधे किसानों के खाते में रकम डालने जैसी लुभावनी योजनाओं के पक्ष में नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार कर्जमाफी को सरकार कई कारणों से सही नहीं मान रही है। पहले, अर्थशास्त्री इसे किसानों की समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं मानते। दूसरे कर्जमाफी का फायदा सभी किसानों को नहीं होता है। मसलन जिन किसानों ने कर्ज नहीं लिया है या जो कर्ज लौटा चुके हैं, उन्हें लाभ नहीं मिल पाता है। कर्जमाफी की राह में एक असल दिक्कत यह है कि तीन राज्यों में कांग्रेस द्वारा की गई कर्जमाफी और इस मुद्दे को कांग्रेस द्वारा जोर-शोर से उठाए जाने से सरकार महसूस करती है कि यदि ऐसा किया तो इसका राजनीतिक लाभ कांग्रेस उठा सकती है।

इसी प्रकार तेलंगाना जैसी योजना, जिसमें प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों के खाते में रकम डाली जाती है, इसे भी सरकार उपयुक्त नहीं मान रही है। हालांकि सरकार का मानना है कि कर्जमाफी की तुलना में यह योजना बेहतर है। लेकिन इसमें असल दिक्कत यह है कि ज्यादातर राज्यों में भू-रिकॉर्ड सही नहीं हैं। इसलिए वास्तविक किसानों की पहचान करना मुश्किल हो जाएगा। उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा मुश्किल होगी। इस योजना के लिए पहले भू-रिकॉर्ड ठीक करने होंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार के स्तर पर ऐसी योजनाओं पर चर्चा चल रही हैं, जिससे किसान लाभान्वित हों तथा वे धीरे-धीरे सशक्त हों। दूसरे, सभी किसानों को उसका फायदा मिले। जो कर्जदार हैं, उन्हें भी और जो नहीं हैं, उन्हें भी। इसलिए फसलों का ज्यादा मूल्य, ब्याज मुक्त कर्ज, एमएसपी पर बिक्री सुनिश्चित कराना, कम दाम में बिकने पर सरकार द्वारा भरपाई, फसलों के ज्यादा उत्पादन और निर्यात पर प्रोत्साहिन राशि, पहले से चल रही योजनाओं का दायरा बढ़ाने जैसे कदमों के शामिल किया जा सकता है। ....और पढ़ें>>>

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