नई दिल्ली : 3 राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस पार्टी का मनोबल बढ़ता नजर आ रहा है. इसी कड़ी में पार्टी को बीजेपी के एक और किले में सेंध लगाने का मौका मिला है। यह मौका दिया है झारखंड के उपचुनावों ने। बीजेपी शासित प्रदेशों झारखंड में उपचुनाव हुए। हत्या के एक मामले में झारखंड पार्टी के विधायक एनोस एक्का के सजा पाने के बाद खाली हुई कोलेबीरा विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव कराए गए थे।अब यहां कांग्रेस को बढ़त मिलने की खबरों से राज्य की सियासत में चहलकदमी तेज होने की आशंका जताई जा रही है।11वें राउंड की काउंटिंग तक कांग्रेस के प्रत्याशी 4 हजार वोटों से आगे दिखाई दे रहे थे
नक्सल प्रभावित कोलेबिरा में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुरुवार को मतदान कराया गया था। जहां करीब 64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपेन मत के अधिकार का इस्तेमाल किया। खास बात यह रही कि उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा की खबर नहीं आई थी। सीट पर कुल 5 उम्मीदवार चुनाव अपनी किस्मत आजमाने के लिए उतरे थे। जिनमें बीजेपी के बसंत सोरेंग, झारखंड पार्टी की मेनन एक्का और कांग्रेस के नमन विक्सेलकोंगाडी प्रमुख हैं। इनके अलावा सेंगेल पार्टी के अनिल कंदुलना और निर्दलीय बसंत डुंगडुंगभी चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे थे। उम्मीद जताई जा रही थी कि यहां त्रिकोणिय मुकाबला देखने को मिलेगा। लेकिन नतीजों के दिन रेस में बीजेपी और कांग्रेस में कड़ा मुकाबला देखने को मिला।

कांग्रेस ने यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ हाथ मिलाने की कोशिश की थी लेकिन झारखंड इससे साफ इनकार करती दिखाई दी।  झारखंड पार्टी के अयोग्य ठहराये गये विधायक एनोस एक्का की पत्नी मेनन एक्का की उम्मीदवारी का समर्थन किया।अब कांग्रेस जीत के करीब नजर आ रही है कि झारखंड मुक्तिमोर्चा के रुख में थोड़ी नरमी आने की संभावना बढ़ गई है।...और पढ़ें>>>

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