लखनऊ : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पथराव के दौरान पुलिसकर्मी की मौत के मामले में निषाद पार्टी  के महासचिव को मुख्य आरोपी बनाया गया है. निषाद पार्टी प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का सहयोगी दल है. गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद पत्थरबाजी में पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी. अभी तक इस मामले में 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. एक अधिकारी ने बताया कि ये सभी उस भीड़ का हिस्सा थे, जिन्होंने पुलिस पर पथराव किया और उन पर लाठियों से हमला किया था.

हेड कांस्टेबल सुरेश वत्स के सिर में पत्थर मारा गया था. सीनियर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि वो पत्थर किसने फेंका था, जिससे सुरेश वत्स की मौत हो गई. लेकिन दो मोबाइल फोन के वीडियोज में देखा जा सकता है कि आरक्षण की मांग के साथ प्रदर्शन कर रहे निषाद समुदाय का नेतृत्व अर्जुन सिंह कश्यप कर रहे थे. कश्यप घटना के बाद से फरार हैं. एक वीडियो में कश्यप को यह कहते हुए सुना जा सकता है, 'मैं यहां मेरे समुदाय की मांग के लिए हूं. अन्य लोगों ने हमारे अधिकार ले लिए और हमें ऐसे ही छोड़ दिया गया.'
पुलिस ने कहा कि कश्यप ने ही पुलिसकर्मियों के खिलाफ भीड़ को उकसाया था. सीनियर पुलिस अधिकारी पीवी रमा शास्त्री का कहना है, 'हम आपराधिक कामों के लिए सख्त धाराएं लगाएंगे. आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी. इससे एक मजबूत संदेश जाएगा और कोई भी पुलिसकर्मियों को नुकसान पहुंचाने की हिम्मत नहीं करेगा.'
बता दें, इस मामले में दर्ज हुए तीन मुकदमों में अब तक कुल 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को स्थानीय प्रशासन की नाकामी करार देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री की रैली की वजह से प्रशासन और पूरे खुफिया विभाग को पता था कि कहां पर किसका धरना-प्रदर्शन होने वाला है, मगर इसके बावजूद यह दुखद घटना घट गयी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसकी आड़ में निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है.
दरअसल है कि गाजीपुर जिले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैली में जाने से रोके जाने से नाराज लोगों द्वारा किए गए पथराव में हेड कांस्टेबल वत्स की मृत्यु हो गयी थी. जिला पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस तथा प्रशासन ने प्रधानमंत्री की रैली में जाने से रोका था. इससे नाराज होकर उन्होंने जगह-जगह रास्ता जाम कर दिया और रैली से लौटने वाले वाहनों पर पथराव किया. इस दौरान जाम खुलवाने गये हेड कांस्टेबल सुरेश वत्स (48) के सिर पर पत्थर लगने से उसकी मौत हो गयी. 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृत पुलिसकर्मी के परिजन को 40 लाख रूपये और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपये की सहायता का ऐलान करते हुए इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिये थे. इस महीने ऐसी वारदात में किसी पुलिसकर्मी की मौत का यह दूसरा मामला है. इससे पहले, गत तीन दिसम्बर को बुलंदशहर में हिंसक भीड़ के हमले में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह मारे गये थे.....और पढ़ें>>>

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