चुनाव से पहले महागठबंधन टूट की कगार पर आ गया है। रविवार को राहुल और तेजस्वी यादव की मुलाकात हुई लेकिन बात नहीं बनी। कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स,जीतनराम मांझी की महत्वकांछा और लालू प्रसाद की होशियारी के चलते सीट के बटवारे को लेकर मुद्दा सुलझ नहीं पा रहा है। इसके बाद  लगता है की महागठबंधन टूट की कगार पर आ गया है।



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राजद, कांग्रेस को आठ सीटों से ज्यादा देने के लिए तैयार नहीं है और कांग्रेस पार्टी ग्यारह से कम लेने को तैयार नहीं है. राजद नेता तेजस्वी यादव की मुलाकात रविवार को कांग्रेस पार्टी के अध्यछ राहुल गाँधी से हुई लेकिन इसका  भी कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद सभी रास्ते बंद होते दिखाई दे रहे है।   इसके बाद अहमद पटेल बहुत देर तक प्रयास करते रहे लेकिन बात नहीं बनीं. इसके बाद कांग्रेस पार्टी बामदलों और रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाह के साथ पार्टी गठबंधन करने की कोशिश में जुटी है। जीतनराम मांझी तथा मुकेश सहनी को भी साथ रखने की अधिक कोसिस कर रही है।

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गठबंधन टूटने का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है की रविवार को राहुल गाँधी और तेजस्वी यादव की बात होने के बाद दिल्ली और पटना में बैठे कुछ शीर्ष नेताओं के फ़ोन बजने लगे और पूछा जाने लगा की अगर गठबंधन टूटता है तो आप किसके साथ खड़े होंगे।

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